AM Post-12 प्रिय दोस्तों सचसंग अब तक हमने दुनियाँ के सभी आठ सौ करोड़ के लगभग और आने वाले इन्सानों के धर्म, जाति, वर्ण, क्षेत्र, भाषा, रँग और लिंग के बिना किसी भेदभाव के उनके आध्यात्मिक और संसारिक जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एवं उनके भले, उन्नति, विकास और उच्च मनोबल की प्राप्ति के लिये हमारी जिन्दगी के कड़वे-मीठे अनुभवों से प्राप्त ज्ञान से और साधना के प्रतिफल से सोलह प्रार्थनायें, एक मास्टर प्रेयर, एक पब्लिक प्रेयर और समाधि प्रक्रिया के पांच भागों के पहले भाग की पोस्ट्स हमारी यानि आपकी वेबसाइट www.aamilmission.com पर लिखी है। अब हम उन सोलह प्रार्थनायें, एक मास्टर प्रेयर, एक पब्लिक प्रेयर और समाधि प्रक्रिया के पांच भागों के पहले भाग की पोस्ट्स की एक E-Book आपके तुरंत संदर्भ के लिये तैयार कर रहे है। बहुत शीघ्र ही आपको हमारी E-Book हमारी वेबसाइट www.aamilmission.com पर आर्डर करने पर मिल जायेगी। सम्मान सहित। आपका 'निमित्त' Please visit my website for more information and beneficial result. www.aamilmission.com I request when you open your i.e. mine website you will see the advertisement. You will see the word 'खोले' in Hindi or 'open' in English or ‘ਖੋਲ੍ਹੇ’ in Punjabi. You have to click one of these word and come back on post by click on word ‘go back one page’ and nothing to do more. Your this action will give me energy, courage and hope to write. Thanks very much.
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Book-My Second chance हमारे विचार से जो इन्सान अर्श से फ़र्श तक गिरता जाता है, उसका वह स्वयं ही कारण, जिम्मेदार और समाधान है। हमारी यह प्रार्थना और हमारी यह पुस्तक ‘माय सेकण्ड चांस’ ही उस इन्सान के समाधान का एक प्रयास है। एक बार अर्श से फ़र्श पर गिरकर दोबारा उठकर चलने यानि प्रयास करने का नाम ही ‘माय सेकण्ड चांस’ है। यही मेरी पुस्तक के टाइटल ‘माय सेकण्ड चांस’ का मतलब है। a. मेरी यह अभ्यास पुस्तक ‘रिक्त स्थान भरने के स्टाइल में है’ जिसका इन्सान को छयासठ दिन निरन्तर अभ्यास करना है। क्योंकि इंसान को अपने संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय में छयासठ दिन का समय लगता है। इसके लिए छयासठ दिन तक अभ्यास (प्रतिदिन तीस मिनट) करने के लिए दो पुस्तकों की जरूरत पड़ती है। b. प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य को फर्श से अर्श पर जाने में कितना समय लगेगा। यह मनुष्य मनुष्य पर निर्भर करता है। साथ-साथ उस मनुष्य के संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय पर परिणाम निर्भर करता है। जिस तरह किसी भी प्राणी को धरती पर आने के लिए कम से कम बारह दिन का (ओपोसम) और अधिक से अधिक 23 महीने का (हाथी) को समय लगता है। किसी पौधे को भी पेड़ बनकर फल देने में भी कम से कम तीन साल का समय लगता है। इतना समय तो हर मनुष्य को अपने प्रयासों अनुसार परिणाम मिलने में मान लेना चाहिए। c. प्रार्थना का मैटेरियल और दो पुस्तकों (एक पुस्तक पृष्ठ संख्या 276) का सेट तो दुनियाँ के सभी धर्म, जाति, वर्ण, क्षेत्र, भाषा, रँग और लिंग आदि आदि के आठ सौ करोड़ इन्सानों को बिना किसी भेदभाव के आपको केवलमात्र कुरियर चार्जेज पर यानि रुपये 200/- पर हमारी वेबसाइट www.aamilmission.com पर जाकर आर्डर देने पर दो पुस्तकों का सैट कूरियर द्वारा आपके घर पहुँच जायेगा। 'कृष्ण कक्कड़ ‘निमित्त'
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Very nice post.
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