AM-LS Post-11 प्रिय दोस्तों निवेदन आपकी यानि हमारी वेबसाइट www.aamilmission.com पर आज के दिनाक में 1,26,320 items, 57,790 comments और 6,316 subscribers है। हररोज़ लगभग 200 से 300 comments आते है। जिनमें मेरी, मेरी पोस्ट्स की और मेरी प्रतिदिन की मेहनत की प्रशंसा और समीक्षा लिखी होती है। आपके इस प्यार से मैं अभिभूत हूँ। आप सब मेरे कद्रदान और मेहरबान हो। 02. मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जब आप कमैंट्स करने के लिये आपकी यानि हमारी वेबसाइट खोलते है तो आपको उसमें विज्ञापन दिखाई देते है। उस पर हिन्दी में शब्द 'खोले' या इंग्लिश में 'open' or पंजाबी में ‘ਖੋਲ੍ਹੇ’ शब्द लिखा होता है। आपको उनमें से किसी एक शब्द पर क्लिक करना है और वापस पोस्ट पर आने के लिए ‘go back one page’ पर क्लिक करना है और कुछ नहीं करना है। 03. आपके एक क्लिक से मुझे Google AdSense से एक सेण्ट मिलेगा। आजकल मुझे Google AdSense से प्रतिदिन तीस से चालीस सेण्ट यानि चार दिन में एक डॉलर यानि एक सप्ताह में दो डॉलर मिल रहे है। आपको मुझे अपनी तरफ से कुछ नहीं देना है बस एक क्लिक देना है। आपकी इस क्रिया से मुझे ऊर्जा, हिम्मत और उम्मीद मिलेगी। मेरी लिखी इन प्रेयर्स, पोस्ट्स से पढ़ने और पढ़कर अमल करने से किसी की जिंदगी संवर जाये तो मुझे संतोष मिलेगा। मुझे इंटरनेट कनेक्शन, वेबसाइट मेंटेनेंस एवं प्रतिदिन दो घंटे की मेहनत करने के खर्चे में आपके एक क्लिक से सहयोग मिलेगा क्योंकि आप सब मेरे www.aamilmission.com परिवार के सदस्य है। धन्यवाद सहित। आपका दोस्त 'निमित्त'
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Book-My Second chance हमारे विचार से जो इन्सान अर्श से फ़र्श तक गिरता जाता है, उसका वह स्वयं ही कारण, जिम्मेदार और समाधान है। हमारी यह प्रार्थना और हमारी यह पुस्तक ‘माय सेकण्ड चांस’ ही उस इन्सान के समाधान का एक प्रयास है। एक बार अर्श से फ़र्श पर गिरकर दोबारा उठकर चलने यानि प्रयास करने का नाम ही ‘माय सेकण्ड चांस’ है। यही मेरी पुस्तक के टाइटल ‘माय सेकण्ड चांस’ का मतलब है। a. मेरी यह अभ्यास पुस्तक ‘रिक्त स्थान भरने के स्टाइल में है’ जिसका इन्सान को छयासठ दिन निरन्तर अभ्यास करना है। क्योंकि इंसान को अपने संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय में छयासठ दिन का समय लगता है। इसके लिए छयासठ दिन तक अभ्यास (प्रतिदिन तीस मिनट) करने के लिए दो पुस्तकों की जरूरत पड़ती है। b. प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य को फर्श से अर्श पर जाने में कितना समय लगेगा। यह मनुष्य मनुष्य पर निर्भर करता है। साथ-साथ उस मनुष्य के संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय पर परिणाम निर्भर करता है। जिस तरह किसी भी प्राणी को धरती पर आने के लिए कम से कम बारह दिन का (ओपोसम) और अधिक से अधिक 23 महीने का (हाथी) को समय लगता है। किसी पौधे को भी पेड़ बनकर फल देने में भी कम से कम तीन साल का समय लगता है। इतना समय तो हर मनुष्य को अपने प्रयासों अनुसार परिणाम मिलने में मान लेना चाहिए। c. प्रार्थना का मैटेरियल और दो पुस्तकों (एक पुस्तक पृष्ठ संख्या 276) का सेट तो दुनियाँ के सभी धर्म, जाति, वर्ण, क्षेत्र, भाषा, रँग और लिंग आदि आदि के आठ सौ करोड़ इन्सानों को बिना किसी भेदभाव के आपको केवलमात्र कुरियर चार्जेज पर यानि रुपये 200/- पर हमारी वेबसाइट www.aamilmission.com पर जाकर आर्डर देने पर दो पुस्तकों का सैट कूरियर द्वारा आपके घर पहुँच जायेगा। 'कृष्ण कक्कड़ ‘निमित्त'
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Very nice post.
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