AM Prayer-15 जब आप सुबह उठते है तो फ्रेश होकर नित्य कर्म करने के बाद समय और अवसर मिलते ही यह प्रार्थना करनी है। नोट: प्राणायाम करते हुए सद्गुरु ॐ का उच्चारण करने के बाद सद्गुरु नाम के ग्यारह प्राणायाम करने है। मेरे सद्गुरु परमात्मा सचसँग मैं तेरा खरब खरब गुणा शुक्रिया अदा करता हूँ कि जो तूँने मुझको, मेरे परिवार के सदस्यों को, दुनियां के आठ सौ करोड़ (Eight billion) इन्सानों को और विशेषकर आमिल को आज का दिन हमारे आध्यात्मिक और संसारिक जीवन में संतुलित नज़रियापूर्वक, साधना, प्रेयर और पुरुषार्थ के साथ साथ सिमरण करते हुए हम सबके भले, उन्नति, विकास और उच्च मनोबल की प्राप्ति के लिए यानि जिन्दगी में समय और पानी की तरह आगे ही आगे और आगे ही आगे बढ़ने के लिए निम्नलिखित आशीर्वाद दिया। तुझसे विनती करता हूँ कि आप अपना प्रेम-प्रेरणा, हिम्मत-आशा, स्वास्थ्य-शक्ति, सुरक्षा-सहारा, विश्वस्नीय-नियंत्रण, मार्गदर्शक-रहनुमा, राज़ी-ख़ुशी, स्वस्थ-शाक्त, भले-उन्नति, रोज़गार-करेंसी, आमदनी-बैंक बैलेंस, जायदाद-जेवरात, खुशहाल-धनाढ्य, सफल-समृद्ध, विकास-उच्च मनोबल, परिस्थितियाँ-अनुकूल, सुख-सुविधा, सेवा-आनन्द, इन्सानियत-विनम्रता, प्राप्ति-मेन्टेन और सकूँन-शांति आदि आदि का वरदहस्त हम सबके सिर पर रख दो। हम सब तो बस तेरी चरण शरण है। यही सब कुछ तुम्हारे आशीर्वाद और हमारे संतुलित नज़रियापूर्वक, साधना, प्रेयर और पुरुषार्थ के साथ साथ सिमरण का फल है यानि हमारा भाग्य है। इसके लिए हम सब तेरे बहुत बहुत शुक्रगुज़ार है, बहुत बहुत आभारी है। नोट: इसके बाद प्राणायाम करते हुए सद्गुरु ॐ का उच्चारण करने के बाद ‘सद्गुरु’ नाम के ग्यारह प्राणायाम करने है। ‘निमित्त’ Visit my website www.aamilmission.com
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Book-My Second chance हमारे विचार से जो इन्सान अर्श से फ़र्श तक गिरता जाता है, उसका वह स्वयं ही कारण, जिम्मेदार और समाधान है। हमारी यह प्रार्थना और हमारी यह पुस्तक ‘माय सेकण्ड चांस’ ही उस इन्सान के समाधान का एक प्रयास है। एक बार अर्श से फ़र्श पर गिरकर दोबारा उठकर चलने यानि प्रयास करने का नाम ही ‘माय सेकण्ड चांस’ है। यही मेरी पुस्तक के टाइटल ‘माय सेकण्ड चांस’ का मतलब है। a. मेरी यह अभ्यास पुस्तक ‘रिक्त स्थान भरने के स्टाइल में है’ जिसका इन्सान को छयासठ दिन निरन्तर अभ्यास करना है। क्योंकि इंसान को अपने संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय में छयासठ दिन का समय लगता है। इसके लिए छयासठ दिन तक अभ्यास (प्रतिदिन तीस मिनट) करने के लिए दो पुस्तकों की जरूरत पड़ती है। b. प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य को फर्श से अर्श पर जाने में कितना समय लगेगा। यह मनुष्य मनुष्य पर निर्भर करता है। साथ-साथ उस मनुष्य के संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय पर परिणाम निर्भर करता है। जिस तरह किसी भी प्राणी को धरती पर आने के लिए कम से कम बारह दिन का (ओपोसम) और अधिक से अधिक 23 महीने का (हाथी) को समय लगता है। किसी पौधे को भी पेड़ बनकर फल देने में भी कम से कम तीन साल का समय लगता है। इतना समय तो हर मनुष्य को अपने प्रयासों अनुसार परिणाम मिलने में मान लेना चाहिए। c. प्रार्थना का मैटेरियल और दो पुस्तकों (एक पुस्तक पृष्ठ संख्या 276) का सेट तो दुनियाँ के सभी धर्म, जाति, वर्ण, क्षेत्र, भाषा, रँग और लिंग आदि आदि के आठ सौ करोड़ इन्सानों को बिना किसी भेदभाव के आपको केवलमात्र कुरियर चार्जेज पर यानि रुपये 200/- पर हमारी वेबसाइट www.aamilmission.com पर जाकर आर्डर देने पर दो पुस्तकों का सैट कूरियर द्वारा आपके घर पहुँच जायेगा। 'कृष्ण कक्कड़ ‘निमित्त'
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Very nice post.
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