***FWAP-F245*** *चाँदनी रात यानि पूर्णिमा की कामना एवं प्रार्थना * हम सदगुरु यानि बुद्ध यानि गॉड यानि अल्लाह यानि परमात्मा के किसी अन्य नाम से जो हम सबमें विद्धमान है, उससे मुझ सहित सृष्टि के सारे बेटे-बेटिओं के सन्तुलित नजरिया, खुशी, स्वास्थ्य, शक्ति, धनाढ्यता, सफलता, स्वस्थ तीन अंकायु, हिम्मत-उम्मीद, फ़ायदा, जिज्ञासा, समझ-बुद्धि, विद्द्या-हुनर, ज्ञान-अनुभव, विवेक-प्रज्ञा, सफल, सुखी एवं भले जीवन की विशेषकर अतिवादिओं के लिए चाँदनी रात यानि पूर्णिमा पर अगले पक्ष यानि 15 दिनों के लिए कामना एवं प्रार्थना करते हैं। हम अतिवादिओं से दुनियाँ के सभी देशों को अपने धर्म के देश बनाने, दुनियाँ के सभी इन्सानों को अपने धर्म का अनुयायी बनाने एवं दूसरे इन्सानों पर अपनी विचारधारा लागू करने के लिए लोभ जिहाद, धोखा जिहाद , लव जिहाद, दहशत जिहाद और अन्य जेहाद आदि आदि का प्रयोग नहीं करने की विनती करते है एवं दूसरे इन्सानों को इंसान समझने की ना कि जानवर समझने की विनती करते है। ना तो हम काफिर है परन्तु हम इंसान है और ना ही आप मलेच्छ हो परन्तु आप भी इंसान हो। हम अतिवादिओं से विनती करते है कि वे कुछ भी बनने से पहले इंसान बने और जियो और जीने दो के सनातन सिद्धान्त का पालन एवं अनुसरण करें। ताकि दुनियाँ में सत्य, अहिंसा, प्रेम, आनन्द,, शांति और सेवा आदि का वातावरण बना रहे जिससे यह दुनियाँ रहने की खूबसूरत जगह यानि स्वर्ग यानि हैवन यानि जन्नत बनी रहे। क्योंकि परमात्मा ने हमें इन्सान बनाया है और हम इन्सानों ने उन्हें हिन्दू, बौद्ध, ईसाई और मुस्लिम आदि आदि बना दिया है। 'निमित्त' 1. Please visit my website https://www.aamilmission.comfor more information and beneficial result. 2. Please recommend my website https://www.aamilmission.com to your friends, relatives and familiars for their benefits
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Book-My Second chance हमारे विचार से जो इन्सान अर्श से फ़र्श तक गिरता जाता है, उसका वह स्वयं ही कारण, जिम्मेदार और समाधान है। हमारी यह प्रार्थना और हमारी यह पुस्तक ‘माय सेकण्ड चांस’ ही उस इन्सान के समाधान का एक प्रयास है। एक बार अर्श से फ़र्श पर गिरकर दोबारा उठकर चलने यानि प्रयास करने का नाम ही ‘माय सेकण्ड चांस’ है। यही मेरी पुस्तक के टाइटल ‘माय सेकण्ड चांस’ का मतलब है। a. मेरी यह अभ्यास पुस्तक ‘रिक्त स्थान भरने के स्टाइल में है’ जिसका इन्सान को छयासठ दिन निरन्तर अभ्यास करना है। क्योंकि इंसान को अपने संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय में छयासठ दिन का समय लगता है। इसके लिए छयासठ दिन तक अभ्यास (प्रतिदिन तीस मिनट) करने के लिए दो पुस्तकों की जरूरत पड़ती है। b. प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य को फर्श से अर्श पर जाने में कितना समय लगेगा। यह मनुष्य मनुष्य पर निर्भर करता है। साथ-साथ उस मनुष्य के संस्कार, स्वभाव, आदतें, चरित्र, सोच-विचार, लक्ष्य, रोलमॉडल, निर्णय, वचन, टोन, कर्म, व्यवहार और आचरण में परिवर्तन होने पर लगने वाले समय पर परिणाम निर्भर करता है। जिस तरह किसी भी प्राणी को धरती पर आने के लिए कम से कम बारह दिन का (ओपोसम) और अधिक से अधिक 23 महीने का (हाथी) को समय लगता है। किसी पौधे को भी पेड़ बनकर फल देने में भी कम से कम तीन साल का समय लगता है। इतना समय तो हर मनुष्य को अपने प्रयासों अनुसार परिणाम मिलने में मान लेना चाहिए। c. प्रार्थना का मैटेरियल और दो पुस्तकों (एक पुस्तक पृष्ठ संख्या 276) का सेट तो दुनियाँ के सभी धर्म, जाति, वर्ण, क्षेत्र, भाषा, रँग और लिंग आदि आदि के आठ सौ करोड़ इन्सानों को बिना किसी भेदभाव के आपको केवलमात्र कुरियर चार्जेज पर यानि रुपये 200/- पर हमारी वेबसाइट www.aamilmission.com पर जाकर आर्डर देने पर दो पुस्तकों का सैट कूरियर द्वारा आपके घर पहुँच जायेगा। 'कृष्ण कक्कड़ ‘निमित्त'
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